Thursday, 23 June 2016

इकतरफ़ा प्रेम और सिगरेट

इकतरफा प्रेम में और सिगरेट में ज़्यादा फ़र्क़ नहीं होता, अमूमन दोनों की तासीर भी एक ही होती है

एकतरफा प्रेम में नहीं होती चुपके से हमें देखती उसकी नज़र, और नज़रें मिल जाने पर धक्क से हो उठता हमारा दिल। ना तो बेमौसम बारिश होती है, ना हवा में उड़ता दुपट्टा, ना शर्माती सी उसकी मुस्कराहट और ना ही आँखों की बातें।
कोई चुपके से हमारी रातों में शहद नहीं घोलता, ना तो पेड़ों से बर्फ उड़ कर हमारे ऊपर गिरती हैं। किताबो के पीछे से कोई आवाज़ें नहीं लगाता, किशोर कुमार के गाने नहीं सुनता, शामों में पोएट्री नहीं गुनगुनाई जाती।

तकियों से लिपट कर नींद नहीं आती, और ना अँधेरे में छत पर कोई तस्वीर इशारा करती है आँखे बंद कर लेने का।

एकतरफा प्रेम में भी सिगरेट की तरह बस एक ही चीज़ होती है..... आग
इतनी की गरम भाप छोड़ती साँसे खुद को ही जलाती हैं। नज़रें देखती नहीं, चीरती हैं। रातें ऐसी होती हैं जैसे जिस्मों में चुभते हज़ारों बिच्छुओं के डंक......
अँधेरा पागल भेड़िये की तरह काटता है, तकियों में कांटे उग आते हैं, पानी कड़वा हो जाता है, ठंडी हवा हड्डियाँ तक नोच देती है
और पोएट्री ! हुँह... पोएट्री तो हलक से हाथ डाल दिल पकड़ कर निचोड़ देती है....

Wednesday, 22 June 2016

आदत खराब है

सामने जो दिखता है, वो बस गुणा-भाग है
पीठ पीछे छिपा, एक और ही हिसाब है,
आगे बस हाँ ही हाँ है, पीछे सब का सब ना
क्या कहें यार, दुनिया की आदत बड़ी खराब है,
.
जिससे भी जब मिली, हंस कर गले मिली

इसकी अदाकारी भी क्या लाज़वाब है

युद्धभूमि

सुरसा सा मुँह बाए
खड़ी है युद्धभूमि
इस तरफ ताकती हुयी,

ढेर की ढेर लाशें जा चुकी हैं पेट में
मगर प्यासी जबान तलाश रही है बस्तियाँ
वहाँ जहाँ सपनो की फसलें बोई जा रही हैं रोटियों के खेत में,


तलवारों की नयी ईंटें पाथ कर
उन्हें खून में रंगना चाहता है
युद्धभूमि में खड़ा वो बिजूका,

जेबों में हीरे भरे
हाथों में पत्थर लिए
उम्मीद भरी मुस्कान फेंकता गुज़रता है गलियों से,

विकास के नारे लगाता
ललचाई चोर नजरों से पिंजर नापता
छपा है दीवारों पे,

उसके साथ चलता हर रास्ता
जाता है युद्धभूमि तक
लाशों का एक और ढेर बनाने।