बरसा था समंदर रात भर
मेरे बिस्तर पर
सहर तक आ गयी थी बाढ़,
हाथ पकड़ कर तुम्हारा
उकडू बैठा रहा था मैं
घुटनो तक पानी में,
मछलियाँ खाई थीं हमने
आँखों में डुबा कर,
.
नमकीन सी लहरों में जो
नमकीन से आंसू
तुमने डुबा कर मार दिए थे,
सुबह सीपियाँ बन कर
किनारे पड़े थे,
.
बिस्तर के नीचे जूते
सूखे पड़े हुए थे
जाने क्यों चुपचाप से रूठ कर,
शायद भीगने से डरते होंगे,
.
गीले कांच के आईने में
तुम्हारी क्लिप
टाइटैनिक जैसी चली जा रही थी,
मेरी कंघियों की शार्क पीछे पीछे थी
.
मेरी उंगलियों को
नहीं आता था तैरना,
वो टुकुर टुकुर एक दुसरे को देखती
रोने लगी थीं,
तब तुम्हारी उंगलियों ने उन्हें
तैरना सिखाया था,
.
तकियों की किश्तियों में
चादर के जाल डाले
पकड़ी थीं हमने
शैतानियाँ
उस रात,
जिस रात बरसा था समंदर रात भर
मेरे बिस्तर पर....
मेरे बिस्तर पर
सहर तक आ गयी थी बाढ़,
हाथ पकड़ कर तुम्हारा
उकडू बैठा रहा था मैं
घुटनो तक पानी में,
मछलियाँ खाई थीं हमने
आँखों में डुबा कर,
.
नमकीन सी लहरों में जो
नमकीन से आंसू
तुमने डुबा कर मार दिए थे,
सुबह सीपियाँ बन कर
किनारे पड़े थे,
.
बिस्तर के नीचे जूते
सूखे पड़े हुए थे
जाने क्यों चुपचाप से रूठ कर,
शायद भीगने से डरते होंगे,
.
गीले कांच के आईने में
तुम्हारी क्लिप
टाइटैनिक जैसी चली जा रही थी,
मेरी कंघियों की शार्क पीछे पीछे थी
.
मेरी उंगलियों को
नहीं आता था तैरना,
वो टुकुर टुकुर एक दुसरे को देखती
रोने लगी थीं,
तब तुम्हारी उंगलियों ने उन्हें
तैरना सिखाया था,
.
तकियों की किश्तियों में
चादर के जाल डाले
पकड़ी थीं हमने
शैतानियाँ
उस रात,
जिस रात बरसा था समंदर रात भर
मेरे बिस्तर पर....

