Saturday, 22 August 2015

साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं

साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं
हँसी मुस्कुराई और तन्हाई में मुलाक़ातें कीं,
कुछ झूठे नखरे दिखाए
कुछ सच्ची तारीफें कीं,
कुछ प्यारे बहाने बनाये
और कुछ नीची आँखें कीं,
साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं...
.
सब कुछ कह गयीं
और कुछ भी ना कहा,
कुछ भी बोली नहीं
और कुछ बाकी ना रहा,
सूरज भी डूबा नहीं और गहरी रातें कीं,
साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं...
.
तेरी याद दिलाई
और तेरी कसमें भी,
कुछ वादे जो हैं किये
और निभानी जो रस्में भी,
थोड़ा हँसी और फिर
आँसुओं की बरसातें कीं,
साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं...
साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं....

Tuesday, 18 August 2015

स्वप्नद्रष्टा



संबंधो का गूढ़ रहस्य
आच्छादित मन
विलोड़ित आकांक्षाएँ
द्रोही दृष्टिकोण
खंडित परंपराएँ
अंतहीन मार्ग
कंटकबिंधित देह
रक्तरंजित स्वप्न
स्नेहित शूल
लयबद्ध प्रहार व्यथित आत्मा पर
.
स्वप्नद्रष्टा का जीवन
शूल पर टिकी देह.....

Monday, 17 August 2015

कल - आज


                                                           
बहते वक्त को अंजुरी में भर लेता है रात का समंदर... जो पेड़ इश्क की पहली बारिश में लगाया था उसकी सिसकियाँ उजालों में भूतों की तरह डराती हैं...
रेगिस्तान की रेत में पानी समंदर भर... बसंती दुपट्टे में बने वो लाल फूल रात भर बारिश की तरह बरसे थे...
अहसास की हरी बेलें... पानी में लाल रंग मिलाकर लिखी जाती कविताएं...
चाँद का एक कंचे बराबर टुकड़ा मेरी जेब में...
 मेंहदी भरे हाथों में कच्चे आम... तुम्हारा दुख मेरे हाथों को चूम कर रोया है...
आसमान में नींद की पतंगें तुम्हारी आवाज़ के झोंकों के साथ उड़ी जा रही हैं... प्यार के कैनवस पर छुअन, गंध, नम होठों का स्वाद...
तुलसी के गमलों मे गिरी कागज़ की नावें... कोई तुम्हारे नाम को गीत बना चुका था...
चूल्हे से उठते धुएं में ताज़ी पकी रोटी की मृगतृष्णा... और ज़िन्दा हो जाती हैं गुलाबी रिबन में लिपटी आकांक्षाएं...
भूख की उदास आँखों में नमक का कसैलापन...अब रात को किसी टूटे हुए दिल की आह सुनाई नहीं देती...
 किशोर चेहरे को अब शहद के रंग की आँखों वाली किसी लड़की की नज़र नहीं लगेगी...

The day after today