Sunday, 13 January 2019

तुम्हारी चिट्ठी

तुम्हारे हाथों की
नरमाई है तुम्हारी चिट्ठी में,
और थोड़ी सी खुशबू
आँसुओं की,

ढेर सारी मुस्कराहट भी
लिफाफे में छुपी है वहीँ,
खोलते ही कमरे में भर गयी है अभी अभी,

दूसरी लाइन में दो अक्षर खो से गए हैं
हमारे साथ की तरह,
शायद अलमारी में सहेजे होंगे कहीं तुमने,

मिल जाये तो साथ लेती आना
कि अब बेतरह याद आ रही है तुम्हारी...

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