Thursday, 28 January 2016

रात

ना जाओ आज कि यूँ ही रात गुज़र जाने दो,
मेरे गेसुओं से खेलो कि इन्हें अपने चेहरे पे बिखर जाने दो ....
ना जाओ आज कि यूँ ही रात गुज़र जाने दो ...

मेरे पहलू में बैठे रहो यूँ ही कि जज़्बात जाएँ जिधर जाने दो ....
ना जाओ आज कि यूँ ही रात गुज़र जाने दो ...

इश्क़ की उस हद तक जाएँ हम कि कोई हद ही ना रहे,
मुझे आगोश में लो कि जाये जहाँ तक ये सफर जाने दो ....

मुझे कतरा-कतरा देखो और समझो तुम,
कि आँखे बंद करो और जाये जहाँ तक नजर जाने दो .....
ना जाओ आज कि यूँ ही रात गुजर जाने दो....

पहली बार मोहब्बत की है मैंने किसी से इस क़दर,
कि अब मेरे जिस्म के हर हिस्से तक इसका असर आने दो....

तुमसे मिल कर और खूबसूरत हुई है मेरी ज़िंदगी,
कि आज की रात इसे जन्नत बनने तक संवर जाने दो ....
ना जाओ आज कि यूँ ही रात गुज़र जाने दो....
ना जाओ आज कि यूँ ही रात गुज़र जाने दो....

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