सारी अलमारियां देख लीं और सारी दराजें भी, मगर उदासी को रखने के लिए मेरे पास कहीं भी जगह नहीं थी।
सब कुछ भरा पड़ा था तन्हाइयों से और मसरूफ़ियत से।
कुछ पुरानी चिट्ठियों में थोड़ी सी जगह मिली तो एक टुकड़ा उदासी उनमें छुपा दी और बाकी की उदासी एक गमले में रोप दी। अब एक पौधा लहलहा रहा है मेरे छज्जे पर जिसमें छोटे-छोटे फल लगे हुए हैं उदासी के।
सोच रहा हूँ कि इनका क्या किया जाए !
सब कुछ भरा पड़ा था तन्हाइयों से और मसरूफ़ियत से।
कुछ पुरानी चिट्ठियों में थोड़ी सी जगह मिली तो एक टुकड़ा उदासी उनमें छुपा दी और बाकी की उदासी एक गमले में रोप दी। अब एक पौधा लहलहा रहा है मेरे छज्जे पर जिसमें छोटे-छोटे फल लगे हुए हैं उदासी के।
सोच रहा हूँ कि इनका क्या किया जाए !
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