Wednesday, 21 October 2015

चाँद और व्हिस्की

उनींदी रातों में
पत्थर मार कर 
तोड़ लेते हैं ठंडे चाँद को
और
उसके टुकड़ों को ग्लास में डाल लेते हैं,
.
बर्फ की तरह पिघलता है मन
चमकीली सी व्हिस्की में
और जहाँ दूर आसमान के हवाईजहाज सा
हिलता हुआ लगता है,
.
रात जितनी आगे बढ़ती है
यादें उतनी ही पीछे
और
हाथ उठा कर आँसू पोंछ देता है
दिल में बैठा हुआ बच्चा सा....

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