Wednesday, 9 September 2015

दो मुक्तक

तू मुझे शराबी ना कह ऐ दोस्त
मुझे तो फ़कत मय का नाम आता है,
मुझसे बड़ा शराबी तो वो खुदा खुद है,
जो इस मयखाने में हर शाम आता है ....
.
तू पैमाने की माप मत देख ऐ दोस्त
ये देख की पैमाने में कितना जाम आता है,
और ये न देख कि हम तो सिर्फ गुज़रे ही हैं मयखाने से,
ये देख कि हम पे अब कितना इल्ज़ाम आता है...

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