Friday, 25 September 2015

बचपन

आज घर बैठ कर सुकूँ की एक रोटी भी तोड़ी नहीं जाती,
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बचपन में इतनी फुर्सत थी की आसमां पे चढ़ कर सितारे तोड़ लिया करते थे...

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