Saturday, 22 August 2015

साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं

साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं
हँसी मुस्कुराई और तन्हाई में मुलाक़ातें कीं,
कुछ झूठे नखरे दिखाए
कुछ सच्ची तारीफें कीं,
कुछ प्यारे बहाने बनाये
और कुछ नीची आँखें कीं,
साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं...
.
सब कुछ कह गयीं
और कुछ भी ना कहा,
कुछ भी बोली नहीं
और कुछ बाकी ना रहा,
सूरज भी डूबा नहीं और गहरी रातें कीं,
साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं...
.
तेरी याद दिलाई
और तेरी कसमें भी,
कुछ वादे जो हैं किये
और निभानी जो रस्में भी,
थोड़ा हँसी और फिर
आँसुओं की बरसातें कीं,
साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं...
साँझ ढले तेरी यादों ने फिर मुझसे बातें कीं....

2 comments:

  1. this is beautiful...maja aa gaya padhke...yun hi likhte raho...apne wyaktitwa ke pat kholte raho....

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  2. शुक्रिया, आप के स्नेह और आशीर्वाद से और भी बहुत कुछ रचने की कोशिश करूँगा।

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