फिलहाल तो फिल्म एवं टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया के छात्र की पहचान के साथ जी रहा हूँ। उसके अलावा पटकथा लेखक, कवि, फ़िल्मकार जैसी कुछ शब्दों में सिमट सकने वाली और पहचानें हैं।
भाई, दोस्त, बेटे जैसी कुछ और पहचानें जोड़ ली जाएँ तो इतनी पहचानें हैं कि कभी कभी मैं खुद को भी नहीं पहचान पाता।
Tuesday, 18 August 2015
स्वप्नद्रष्टा
संबंधो का गूढ़ रहस्य आच्छादित मन विलोड़ित आकांक्षाएँ द्रोही दृष्टिकोण खंडित परंपराएँ अंतहीन मार्ग कंटकबिंधित देह रक्तरंजित स्वप्न स्नेहित शूल लयबद्ध प्रहार व्यथित आत्मा पर . स्वप्नद्रष्टा का जीवन शूल पर टिकी देह.....
No comments:
Post a Comment